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स्पाइडर मैन की ड्रेस पहनकर यह शख्स साफ कर रहा है कचरा, जानिए क्या है मकसद


जकार्ता. इंडोनेशिया में कैफे में काम करने वाले रूडी हार्टोनो ने अपने समुदाय के लोगों को सड़कों और समुद्र तटों पर बिखरे कूड़े को साफ करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की। मगर, उन्हें कोई विशेष फायदा नहीं हुआ। वह अकेले ही यह काम किया करते थे। कोई भी उनके साथ जुड़कर इस काम में आगे नहीं आता था। हालांकि, जब उन्होंने स्पाइडर-मैन की तरह तैयार होकर यह काम करना शुरू किया, तो लोगों का ध्यान उनकी तरफ गया।

36 साल के हार्टोनो ने स्पाइडर मैन के कपड़े पहनने के बाद जब यह काम करना शुरू किया, तो लोगों की प्रतिक्रिया असाधारण थी। वह आमतौर पर स्पाइडर-मैन के रूप में कचरा जमा करने का काम शाम सात बजे से शुरू करते थे। उसके प्रयासों से राष्ट्रीय स्तर पर कचरे की समस्या को सुर्खियों में आने में मदद मिली।

अखबारों में उनका इंटरव्यू छपा और उनकी प्रेरणा को समझाने के लिए स्पाइडर मैन की ड्रेस में उनके कई चैट शो टीवी में दिखाए गए। उन्होंने कहा कि शुरू में यह ड्रेस उन्होंने अपने भतीजे को खुश करने के लिए खरीदी थी, लेकिन बाद में अन्य के अन्य लोगों ने भी इसकी वजह से उन पर ध्यान देना शुरू कर दिया।

लगभग 142,000 की आबादी के साथ, पर्यावरण और वानिकी मंत्रालय द्वारा 2018 में जारी आंकड़ों के अनुसार, पेरपे प्रति दिन लगभग 2.7 टन अप्रयुक्त कचरे का उत्पादन करता है। अध्ययन के अनुसार, इंडोनेशिया, 17,000 से अधिक द्वीपों का एक द्वीपसमूह, चीन के बाद महासागरों में प्लास्टिक प्रदूषकों का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

पर्यावरण और वानिकी मंत्रालय द्वारा 2018 में जारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग एक लाख 42 हजार की आबादी के साथ प्रति दिन लगभग 2.7 टन अप्रयुक्त कचरा निकलता है। एक अध्ययन के अनुसार, चीन के बाद महासागरों में प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने के मामले में इंडोनेशिया का दूसरा स्थान है। हार्टोनो ने कहा कि उम्मीद है कि सरकार एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक बैग सहित कचरे के प्रबंधन पर कड़े नियमों को लागू करने पर अधिक जोर देगी। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे को कम से कम करना सबसे महत्वपूर्ण काम है, क्योंकि प्लास्टिक को विघटित करना मुश्किल है।

बताते चलें कि इंडोनेशिया के कई हिस्से कचरे से निपटने के लिए संगठित सार्वजनिक सेवाओं बहुत कम हैं। खासतौर पर प्लास्टिक का कचरा अक्सर नदियों या महासागरों में जाकर मिल जाता है। जर्नल साइंस के साल 2015 के एक अध्ययन में कहा गया था कि दुनिया के चौथे सबसे अधिक आबादी वाले इस देश से सालाना 3.2 मिलियन टन कचरा पैदा होता है, जिसमें से आधा कचरा समुद्र में गिरता है।

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