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भूसे से पोषक तत्व गायब, पशुओं में हो रही खून की कमी


रायपुर. राज्य स्तरीय रोग अन्वेषण प्रयोगशाला की एक रिपोर्ट ने प्रदेश के पशुपालकों को चिंता में डाल दिया है। पिछले पांच महीनों में की गई करीब आठ हजार से ज्यादा दुधारू पशुओं की जांच में दो हजार से ज्यादा पशु एनीमिक पाए गए यानी उनके खून में हीमोग्लाबिन की मात्रा सामान्य से कम पाई गई।

दुधारू पशुओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा सात से 14 प्रति जीडी (ग्राम डायल्यूशन) होनी चाहिए, जबकि इन पशुओं में यह मात्रा पांच ग्राम ही पाई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया के बढ़ते प्रयोग, फसल कटाई में हार्वेस्टर के उपयोग और हरे चारे की कमी की वजह से ये समस्या आई है।

पिछले कुछ समय से पशुपालक शिकायत कर रहे थे कि उनके पशु दूध कम दे रहे हैं। कमजोर दिखाई देते हैं और कई बार चक्कर खाकर गिर जाते हैं। बढ़ती शिकायतों को देखते हुए पशु चिकित्सकों द्वारा राज्य स्तरीय रोग अन्वेषण प्रयोगशाला में मवेशियों के खून की जांच शुरू कराई गई।

लैब के उपसंचालक डॉ. एनके शुक्ला के अनुसार अप्रैल से अगस्त के बीच खून के कुल 9,359 नमूने जांच के लिए आए। इनमें गाय, भैंस और बकरियों के करीब आठ हजार नमूने शामिल थे। जांच में 2170 दुधारू पशुओं में होमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम पाई गई। पशु चिकित्सकों के अनुसार हीमोग्लोबिन की कमी की मुख्य वजह भोजन में पोषक तत्वों की कमी है।

इसलिए हुई भूसे में पोषक तत्वों की कमी

1. यूरिया का बढ़ता प्रयोग

विशेषज्ञ बताते हैं कि खेती में यूरिया के बढ़ते प्रयोग से उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है। फसलों के अवशेष को दुधारू पशु चारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसमें अब पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा नहीं रही। पशुओं का पेट तो भरता है, लेकिन पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते।

2. हार्वेस्टर का उपयोग

पशु चिकित्सक डॉ. संजय दलवी कहते हैं कि फसलों की कटाई में हार्वेस्टर का उपयोग पोषक तत्वों को खत्म कर देता है। जब किसान हार्वेस्टर से गेहूं की फसल काटता है तो केवल बालियां ही एकत्र की जाती हैं, जबकि शेष भाग खेत में ही बेकार छूट जाता है। इन डंठलों में पोषक तत्वों की खासी मात्रा होती है।

3. हरे चारे की कमी

पशुधन सेवाएं विभाग के संचालक डॉ. आर. प्रसन्ना की मानें तो प्रदेश में हरे चारे का संकट है, क्योंकि राज्य में गेहूं से ज्यादा धान की खेती होती है। हालत ये हो जाती है कि सीजन खत्म होने के बाद सिर्फ 50 फीसद पशुओं को ही हरा चारा मिल पाता है। हरे चारे की कमी भी दुधारू पशुओं में हीमोग्लोबिन की कमी का एक बड़ा कारण है। हालांकि गोठान योजना से इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। गोठान योजना के जरिए हरा चारा तैयार करने की योजना है।

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