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“किसी की बातों को मन में पकडक़र रखने से हमारा ही नुकसान, बातों को पकड़े रहने की आदत छोडे़”

बिलासपुर. हम थोड़ा गहराई से सोचें कि किसी वस्तु को चाहे कागज का टुकड़ा ही क्यों न हो, बहुत देर तक नहीं पकड़ सकते। कुछ घण्टे ही पकडऩे के बाद हमारे हाथों में दर्द होने लगेगा, यदि किसी ने चैलेन्ज किया तो जबरदस्ती कुछ देर और पकड़ लेंगे, लेकिन उसके बाद हाथ अकड़ सकता है। यह बातें टिकरापारा में चल रहे तनावमुक्ति शिविर के दूसरे दिन ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कही।  उन्होंने कहा कि ये तो हो गई शरीर की बात, लेकिन यह भी सोचें कि हम किसी की कही हुई बात को सालों साल तक मन में पकडक़र रखे रहते हैं जो कि निश्चित ही हमें तनाव देगा। यदि उस बात को हम कुछ समय और हम पकड़ रहें तो हो सकता है। हम अवसाद अर्थात डिप्रेशन की अवस्था में चले जाएं और खास सोचने वाली बात तो यह है कि हम जिनकी बातों को पकड़े हुए हैं वो तो बहुत खुश हैं और हमारा ही मन दर्द में, तनाव में, दुख में रहता है। ये तो समझदारी नहीं हुई न। दीदी ने मेडिटेशन के द्वारा आत्म अनुभूति कराते हुए कहा कि आत्मा का ओरिजिनल प्रेम, शांति, सुख है। आज मनुष्य अपनी शक्तियों का केवल 10 प्रतिशत या उससे भी कम उपयोग करता है। जैसे हनुमान जी को अपनी शक्तियों की स्मृति नहीं थी पर जैसे ही जामवंत जी ने उन्हें शक्तियों की स्मृति दिलाई वे शक्तिशाली हो गए। ऐसे ही मेडिटेशन में जब हम परमात्मा से कनेक्ट होते हैं तो उस प्यार के, शांति के सागर, सर्वशक्तिमान परमात्मा से हमारे अंदर शक्तियों का संचार होने लगता है और हमारे अंदर प्यार, शांति, शक्ति का स्त्रोत बहने लगता है। उसके बाद जब हम कर्मक्षेत्र में आते हैं तो हमसे प्रेम व शांति की गंगा बहने लगती है।

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