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शिक्षाकर्मियों वाली हाईपावर कमेटी सरकार को सौंप सकती है अपनी रिपोर्ट

रायपुर | हाईपावर कमेटी अगले कुछ घंटों में शिक्षाकर्मियों के मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने जा रही है। तैयारी कल ही रिपोर्ट सौंपने की चल रही है, लेकिन अगर कुछ पेंच फंसा तो फिर शायद 5 या 6 जून तक भी वक्त जा सकता है। वैसे अफसर कल ही रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह 5 जून से तीन दिनों के लिए फिर से विकास यात्रा पर जा रहे हैं,पांच से सात तारीख तक आठ जिलों-राजनांदगांव, बालोद, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, रायगढ़, दुर्ग और बेमेतरा के विभिन्न क्षेत्रों का तूफानी दौरा करेंगे। ऐसे में उम्मीद यही है कि कल ही रिपोर्ट सरकार को सौंपी जी जा सकती है। हालांकि मसला ये नहीं है कि शिक्षाकर्मियों की रिपोर्ट कब पेश हो रही है, सबसे बड़ा मसला ये है कि आखिरकार उस रिपोर्ट के उस पिटारे से संविलियन का जिन्न निकलेगा या नहीं।

रिपोर्ट को लेकर अधिकारियों का अभी भी यही कहना है कि जल्द ही कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। सूत्रों के मुताबिक कमेटी ने अपनी फाइंडिंग तैयार कर ली है और अब सिर्फ और सिर्फ चीफ सिकरेट्री के आखिरी अनुमोदन के बाद रिपोर्ट सरकार के सुपूर्द कर दिया जायेगा। सोमवार को रिपोर्ट पूरी तरह से तैयार हो जायेगा।

हालांकि अभी तक की जो चर्चा है उसके मुताबिक संविलियन का प्रस्ताव रिपोर्ट में शामिल है, लेकिन कई शर्तों के साथ। अब ये शिक्षाकर्मियों को तय करना होगा कि वो शर्तें उन्हें मंजूर होगी या नहीं। हालांकि ये तमाम बातें सिर्फ और सिर्फ कुछ अधिकारियों के आधार पर ही है। इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है। यहां तक की बताने वाले भी इस मामले में खुद की बातों को खबरों में कोड करने से मना कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक शिक्षाकर्मियों की जिद को देखते हुए प्रस्ताव में संविलियन के कुछ बिंदु प्रस्ताव के तौर पर दिये गये हैं। हालांकि खुलासा इस मामले में कुछ भी अभी तक नहीं किया गया है। इसकी एक बड़ी वजह से मुख्यमंत्री का शिक्षाकर्मियों के मुद्दे पर खुद निर्णय लेना। मुख्यमंत्री रमन सिंह ही ये तय करेंगे, कि शिक्षाकर्मियों को संविलियन किस आधार पर देना है…राजस्थान या मध्यप्रदेश मॉडल पर देना है या फिर संविलियन का कोई अन्य रास्ता सरकार सुझायेगी।

फिलहाल ये जरूर है कि अधिकारियों ने संविलियन के प्रस्ताव भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किये हैं, लेकिन उससे ज्यादा पदोन्नति, ट्रांसफर और अनुकंपा नियुक्ति यानि जिन मांगों को लेकर कमेटी का गठन किया गया था, उन पर दूसरे राज्यों से नियमावली को आधार बनाकर प्रस्ताव में शामिल किया गया है। चर्चा ये भी है कि रिपोर्ट के साथ मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों जगहों के संविलियन की नियमावली भी सरकार को सौंपी जायेगी और साथ ही एक और प्रस्ताव जो यहां के अफसरों ने तैयार किया है.. उसका भी खाका सरकार को भेजा जायेगा।

रिपोर्ट सौंपने के बाद एक से दो दौर की बैठक मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ करेंगे और उसके बाद उसका औपचारिक ऐलान कर दिया जायेगा। ऐसे में कहा जा सकता है कि जून के दूसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री शिक्षाकर्मियों के मुद्दे पर बड़ा फैसला ले लेंगे। हालांकि वो संविलियन की मांगों को लेकर फैसला होगा या फिर अन्य रास्तों से शिक्षाकर्मियों को राहत देने की बात होगी, इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।

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